राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018: मरूभूमि में फिर से खिलेगा कमल, त्रिपुरा चुनाव के आंकड़े भी पक्ष में

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राजस्थान सरकार

भले ही राजस्थान उपचुनावों के नतीजे भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में न गए हों लेकिन आगामी राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में राजस्थान की मरूभूमि में बीजेपी का कमल ही खिलेगा, इसकी पूरी संभावना है। यहां तक की त्रिपुरा से आए विधानसभा चुनावों के नतीजे भी इस बात की पुष्टि करते हैं। त्रिपुरा में 60 सीटों पर हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 44 सीटों पर कब्जा करते हुए एकतरफा ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। यह जीत राजस्थान के नजरिए से भी काफी अहम है क्योंकि त्रिपुरा की जीत में राजस्थानियों का भी बड़ा योगदान है। त्रिपुरा में बड़ी संख्या में प्रवासी राजस्थानी हैं, जिन्होंने भाजपा को भरपूर समर्थन दिया। ऐसे में राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 के नतीजे यकीनन वर्तमान राजस्थान सरकार और मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के पक्ष में आते दिखाई दे रहे हैं।

भाजपा का वोट शेयर आधे से भी अधिक

त्रिपुरा में हुए वोटिंग शेयर की बात करें तो यहां 1.3 प्रतिशत से 43 प्रतिशत हुआ भाजपा का वोट शेयर है। इसमें सहयोगी दलों का 8 प्रतिशत शामिल कर लें तो वोटिंग शेयर 51 प्रतिशत हो जाता है। दूसरी ओर, कांग्रेस का वोट शेयर सिमटकर केवल 1.8 प्रतिशत रह गया है। नागालैण्ड में भाजपा का वोट शेयर 2 प्रतिशत से 14 प्रतिशत हो गया है। इसमें सहयोगी दलों का वोट शेयर शामिल करें तो यह 40 प्रतिशत हो गया है, जबकि कांग्रेस का वोट शेयर 2 प्रतिशत ही रह गया है।

आजादी के बाद मोदी सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री

लगातार एक के बाद एक राज्य फतह करती जा रही भारतीय जनता पार्टी की जीत का सबसे ज्यादा श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जाता है। कहना गलत न होगा कि मोदी अब तक के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री का चेहरा बनकर उभरे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के संगठन कौशल से भाजपा पूर्वोत्तर में जीरो से टॉप पर पहुंच गई है। पार्टी का जनाधार लगातार बढ़ता जा रहा है। इस जीत से पूर्वोत्तर का राजनीतिक चित्र बदल गया है। अब देश में 20 राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सरकारें हैं। विपक्ष में बैठी कांग्रेस केवल चार राज्यों में सिमट गई है। ऐसे में राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 के नतीजे किसी ओर दिशा में जाने की संभावना कम ही है।

विकास आधारित राजनीति का असर

विकास आधारित राजनीति के दम पर ही भाजपा को यह ऐतिहासिक सफलता मिली है। पूर्वोत्तर में मिली शानदार सफलता से पूरे देश में भाजपा के पक्ष में माहौल बना है। जैसाकि सभी जानते हैं, त्रिपुरा एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है। इसके बाद भी यहां भाजपा को शानदार समर्थन मिला है। इसका परिणाम राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में भी देखने को मिलेगा।

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