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भाईदूज-पूजा की विधि व शुभ मुहूर्त
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भाईदूज-पूजा की विधि व शुभ मुहूर्त

पांच दिवसीय दीपोत्सव का आज आखिरी पर्व है। आज कार्तिक शुक्ल दूज यानि भाईदूज है। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितिया तिथि को मनाया जाता है। आज के दिन बहिनों अपने भाईयों के स्वास्थ्य और लंबी आयु के लिए कामना करते हुए दूज माता का पूजन करती हैं। पूजन और भाईयों के तिलक दिलाकर ही बहिनें खाना खाएंगी। भाईदूज को भाऊ बीज और भातृ द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है।

ऐसे करें भाईयों को तिलक

भाईदूज के दिन सुबह स्नानादि कर पवित्र हो जाना चाहिए। उसके बाद शुभ मुहूर्त के समय भाई को रोली और चावल से तिलक करना चाहिए। तिलक करते समय ईश्वर से भाई की लम्बी और स्वस्थ रहने की कामना करनी चाहिए और तिलक कर भाई को मीठा खिला देना चाहिए। ध्यान रखे कि भाई को तिलक किए बिना भोजन और जल न ग्रहण करने दें। इसके बाद अगर आपसे संभव हो सके तो इस दिन नदी में अवश्य स्नान करें क्योंकि इससे बहुत बड़ा लाभ मिलता है।

भाईदूज पूजन का शुभ मुहूर्त

भाईदूज शुभ मुहूर्त – 01:09 से 03:17 तक

द्वितिया तिथि प्रारम्भ – 09 नवम्बर 2018- शाम 07:07 से

द्वितिया तिथि समाप्त – 09 नवम्बर 2018- शाम 07:20 तक

भाईदूज का पौराणिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान सूर्य देव की पत्नी छाया दो संताने थी। एक यमराज और दूसरी बेटी यमुना थी। यम अपनी बहन यमुना को बेहद प्रेम करते थे। यमराज अपनी बहन की हर मनोकामना पूरा करते थे। यमुना जब भी यमराज को अपने घर खाने को बुलाती थी लेकिन व्यस्त रहने के कारण यम पहुंच नहीं पाते थे। एक दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज ने अपनी बहन से मिलने उनके घर पहुंच गए। अपने भाई यमराज को देखकर यमुना काफी खुश हुई । उन्होंने अपने भाई को अपने हांथो से बनाकर कई पकवान खिलाए। प्रसन्न होकर यमराज ने बहन से कुछ मांगने को कहा वरदान मांगने को कहा। यमुना ने अपने भाई यमराज से वरदान मांगा से कहा कि आप हर साल इसी दिन मेरे घर खाने के लिए आएंगे । अगर कोई भाई अपनी बहन के घर जाता है आज के दिन तो उसे यम का भय न हो. उसके बाद यह प्रथा जो शुरू हुई आज तक चली आ रही है।

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