राजस्थान में गुर्जर आरक्षण आंदोलन 13साल बाद एक बार फिर रेलवे ट्रैक पर आ गया है। सवाई माधोपुर के पास मलारना रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में गुर्जर जमा हो गए हैं। रेलवे ट्रैक पर गुर्जरों के जमा होने से मुंबई-दिल्ली की करीब 21 ट्रेनें प्रभावित हो रही है जिससे हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गुर्जर आरक्षण आंदोलन शुरू करने से पहले गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने सरकार से आरक्षण के मुद्दें पर बात कर हल की बात भी कहीं थी। लेकिन, सूबे के दोनों मुखिया गहलोत और पायलट इस पर मीडिया से सवाल पर ‘पहले आप, पहले आप‘ करते रहे। जिसका खामियाजा राजस्थान की जनता को भुगतना पड़ रहा है।

वीडियो में देखिए सरकार गुर्जर आरक्षण पर कितना गंभीर है। 👇👇

गुर्जर आंदोलन शुरू होने से गहलोत-पायलट पार्टी और सरकार की दुहाई देते हुए आरक्षण के सवाल पर पल्ला झाड़ते हुए नजर आएं। हालांकि, मानवाधिकार आयोग ने सख्ती दिखाते हुए सरकार को बिना देरी के कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। आज शाम को सरकार के प्रतिनिधियों के तरफ से गुर्जरों से वार्ता का समय जरूर रखा गया है। लेकिन, सूबे के मुखिया की बयानबाजी से सहमति बनते नहीं दिख रही है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुर्जर आरक्षण के सवाल पर कहा है कि ये मसला केन्द्र सरकार का है। राजनीति के जानकारों की माने तो गहलोत की बात करने की शैली से ये स्पष्ट है कि राज्य सरकार इसे केन्द्र सरकार का मुद्दा बताकर पल्ला झाड़ना चाहती है। वहीं, बैंसला पांच प्रतिशत आरक्षण के लिए आर-पार की लड़ाई के मूड में है। ऐसे में सरकार की उदासीनता आमजन पर भारी पड़ती नजर आ रही है।

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