अनंत चतुर्दशी के पर्व पर दिगंबर जैन मंदिरों में की गयी पूजा

भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी कहा जाता है. इस साल आज के दिन ही गणेश जी को भी विसर्जित किया जा रहा हैं, गणेश जी 10 दिन के लिए सभी के घरों में आते हैं और 11वे दिन वापस कैलाश लोट जाते हैं, अनंत चतुर्दशी का व्रत भी रखा जाता है  सुबह स्नान करने के बाद व्रत करने का संकल्प लेना चाहिए, व्रत का संकल्प और पूजन किसी पवित्र नदी या फिर तालाब के किनारे ही करना चाहिए, ऐसा संभव न हो सके तो फिर घर में कलश स्थापित कर सकते है।

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अनन्त चर्तुदशी के साथ- साथ दिगम्बर जैन धर्मावलम्बियों ने पूरा दिन धर्म-ध्यान, त्याग-तपस्या में रहकर मंदिरों में दिनभर पूजा पाठ की एवं सांय काल श्रीजी के कलशाभिषेक किये। जैन बन्धुओं ने अपने कार्यालयों से लिया अवकाश । शहर के 250 से भी अधिक दिगंबर जैन मंदिरों व चैत्यालयों में प्रातः 11.15 बजे से विधानमण्डल पर 24 तीर्थंकरों की पूजा।

 

अनजाने की हुई वर्ष भर की गलतियों की आपस में क्षमा मागेंगे

राजस्थान प्रदेश के मंत्री विनोद जैन ‘‘कोटखावदा‘‘ के अनुसार 07 सितम्बर,2017 को षोडष कारण समापन के बाद सायंकाल प्रतिपदा के कलश होंगे। श्रीजी की आरती के बाद सभी दिगम्बर जैन घर-घर जाकर पडवाढोक (क्षमावाणी) मनोयेगे। जाने -अनजाने में हुई वर्ष भर की गलतियों की आपस में खोपरा मिश्री खिलाकर क्षमा मागेगें।

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