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All the crows have joined the Congress, who can eat now?

चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं। सारे नेताओं ने अपनी कमर कस ली है। हर कोई अपने आप को बेहतर और ईमानदार बताने की कोशिश कर रहा है। ख़ास तौर पर विपक्ष के नेता इस बात पर अपना पूरा जोर लगाए हुए है की जनता के सामने उनकी अच्छी छवि दिखाई दे। क्योंकि बहुत जल्द ही वो समय भी आने वाला है, जब हर गली, मौहल्ले और सड़कों पर एक ही आवाज गूंजेगी। यही कि “सभी क्षेत्र वासियों को सूचित किया जाता है कि आपके विधानसभा क्षेत्र से लोकप्रिय, कर्मठ, जुझारू, ईमानदार, मेहनती और प्रगतिशील उम्मीदवार, जिनका चुनाव चिन्ह ये है, को अपना अमूल्य मत एवं समर्थन देकर विजयी बनायें”।  जिसे हम बचपन से सुनते आये हैं। बचपन में भले ही कुछ समझ में नहीं आता हो लेकिन सुनने में मज़ा खूब आता था। आज इसका सही मतलब समझ में आता है। कौन कितना ईमानदार है, और कौन कितना कर्मठ। लोकप्रियता तो आजकल ढिंचैक पूजा और डब्बू अंकल को भी मिल जाती है। सोशल मीडिया का जमाना जो है। कोई भी चीज़ पलक झपकते ही वायरल हो जाती है।

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File-Image: राजस्थान कांग्रेस.

तेजी से बदलते इस समय में आज भी कुछ ऐसी बाते हैं जो बदली नहीं हैं। जैसे अभी श्राद्ध पक्ष चल रहे हैं। श्राद्ध पक्ष में अपने पितरों के तर्पण के लिए कौवों को भोजन करना। जिसे हम कनागत के नाम से भी जानते हैं। आज के ज़माने में भी लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके मोक्ष के लिए कनागतों में भोग लगाते हैं। पुरानी कहावत है की श्राद्ध पक्ष कौवों भोजन कराया जाता है। लेकिन अब ऐसा समय आ गया की कनागत का भोग खिलाने के लिए कौवे मिलना ही बंद हो गया है। आजकल ना तो कौवे कहीं दिखाई देते हैं और ना ही कनागत खाने आते हैं। कहीं इसका एक कारण ये तो नहीं की सारे के सारे कौवे कांग्रेस में जाकर शामिल हो गए हैं।

आये दिन कांग्रेस के नेताओं की हरकतों से तो यही सिद्ध होता है, कि सारे के सारे कौवे एक साथ कांग्रेस में जाकर इकट्ठे हो गए। क्योंकि कांग्रेस के सभी नेता एक साथ जहाँ भी एकत्रित होते हैं, तो मतलब की बातें तो ये करते नहीं, बस बेमतलब की काँव-काँव ही करते हैं। इनमे ना केवल बड़े नाम जैसे अशोक गहलोत, सचिन पायलट, सी. पी. जोशी, रामेश्वर लाला डूडी, प्रताप सिंह खाचरियावास और अविनाश पांडेय शामिल हैं बल्कि कई छोटे मोटे नाम भी शामिल हो चुके हैं। मतलब जिनको कुछ काम नहीं वो कांग्रेस में जाकर शामिल हो जाता है और कांव-कांव करने लग जाता है। विकास करना और जनकल्याण करना तो इनके बस की बात नहीं।

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2013 में जब भाजपा की सरकार बनी तब से अब तक राजस्थान के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य हुए हैं। केवल उन विधानसभा क्षेत्रों को छोड़कर जहाँ कांग्रेस के विधायक हैं। क्योंकि विकास करना तो कांग्रेसियों की नियत में ही नहीं है। लेकिन फिर भी राजस्थान में वसुंधरा राजे ने विकास की नयी गाथा लिखकर एक नया इतिहास रच दिया है। आज राजस्थान विकास और प्रगति के हर क्षेत्र में नंबर एक बनने के बहुत करीब पहुँच चुका है। और कई क्षेत्रों में तो नंबर एक बन भी चुका है। जिसका पूरा श्रेय मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और भारतीय जनता पार्टी की सरकार को जाता है।ऐसे में कांग्रेसी नेताओं के पास अब कांव-कांव करने के आलावा कोई दूसरा काम भी नहीं बचा है। तो करते रहे कांव-कांव। भाजपा सरकार ने तो एक बार फिर प्रदेश में अपनी सरकार बनाने और प्रदेश को विकास के रथ पर सवार करके बहुत आगे तक ले जाने की तैयारी पूरी कर जी है। इंतज़ार है तो सिर्फ चुनावों की औपचारिकताओं का। जिसकी ज़िम्मेदारी प्रदेश के भाजपा कार्यकर्ता पूर्ण रूप से निभा रहे हैं, और उनका उत्साह बढ़ने व उनमे जीत का मंत्र फूंकने के लिए बीजेपी के राष्ट्रिय अध्यक्ष अमित शाह भी राजस्थान में कार्यकर्ता सम्मेलनों को सम्बोधित कर रहे हैं।

 

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