आदर्श विद्यालय योजना: शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव का एक प्रयास

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प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में छात्र-छात्राओं को विद्यालय में उत्तम शिक्षा एवं बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए राजस्थान सरकार ने एक योजना चलाई है। इस योजना के तहत आदर्श शिक्षा एवं उज्जवल भविष्य के मूल मंत्र के साथ विद्यालयों को मॉडन बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस योजना का नाम है आदर्श विद्यालय योजना। इस योजना के तहत विद्यालयों में भौतिक संसाधनों का विकास करते हुए 250 करोड़ की अतिरिक्त राशि राज्य सरकार ने स्वीकृत कर राज्य का अंश बढ़ाया है। योजना का उद्देश्य यही है कि प्रदेश में शैक्षिक उन्नयन को सभी स्तरों पर सुनिश्चित किया जा सके।

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आदर्श विद्यालय योजना के तहत बीते 5 वर्षों में राजस्थान सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में नवाचार अपनाते हुए प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में कक्षा 1 से 12 तक के सरकारी विद्यालयों में आधुनिक शिक्षा की समुचित व्यवस्था की है। अब इन विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक, आधारभूत सुविधाएं जैसे कक्षा कक्ष, छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय, चार दीवारी, प्रयोगशाला, कंप्यूटर, इंटरनेट आदि सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं जिससे शिक्षा का स्तर बढ़ा है और साथ ही साथ प्रवेश की संख्या भी। शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए जो नवाचार राजस्थान में अपनाए गए, उनके कारण सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों का नामांकन तेजी से बढ़ा है, बाकायदा इसके लिए विशेष अभियान चलाया गया।

नवाचारों से बढ़ा नामांकन

विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का विकास करने के साथ ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सुनिश्चित किया गया। शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए राज्य में पंचायत स्तर पर 9 हजार 895 आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालयों में पहली से 12वीं तक की शिक्षा एक ही स्कूल में दिए जाने की पहल की गई है। इसके साथ ही, 9 हजार 610 उत्कृष्ट विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई एक ही स्कूल में अब कराई जा रही है। इसके साथ ही पिछड़ी पंचायत समितियों में स्वामी विवेकानन्द राजकीय मॉडल स्कूलों की स्थापना की गई। सीबीएसई पैटर्न के इन विद्यालयों में अच्छी प्रयोगशालाएं, अच्छे क्लास रूम्स और खेल मैदान हैं। इससे विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई की सुविधा मिल रही है ताकि वह प्रतिस्पर्धा में किसी से पीछे नहीं रहें। परिणाम यह हुआ कि 15 लाख के करीब नए विद्यार्थियों का सरकारी विद्यालयों में नामांकन हुआ है।

नवाचारों से सुधार और सकारात्मक बदलाव

हर ग्राम पंचायत में एक उच्च माध्यमिक विद्यालय खुले, इसके लिए 5 हजार माध्यमिक विद्यालयों को उच्च माध्यमिक विद्यालयों में क्रमोन्नत किया है। इसी का परिणाम है कि वर्ष 2013 तक जहां प्रदेश में मात्र 4435 राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय थे, वह बढ़कर अब 9435 हो गए हैं। यही नहीं बोर्ड परीक्षा परिणामों में भी तेजी से सुधार हुआ है। कक्षा 10 में परीक्षा परिणाम 66 से बढ़कर 73 प्रतिशत हो गया और कक्षा 12 में 78 से बढ़कर यह 88 प्रतिशत हो गया है। माध्यमिक विद्यालयों में रिक्त पद 60 प्रतिशत से घटकर 25 प्रतिशत रह गया है। स्पष्ट है शिक्षा क्षेत्र में सुधार और सकारात्मक बदलाव के परिणाम सामने आने लगे हैं।

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